22 जुलाई की बाढ़ ने कदेर गांव में मचाई ऐसी तबाही कि घर, जनमन आवास, स्कूल और ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत पलभर में बह गई
[संवाददाता दीनू बघेल] नारायणपुर। अबूझमाड़ के कदेर गांव की तस्वीरें किसी प्राकृतिक आपदा के बाद के भयावह मंजर को बयां कर रही हैं। 22 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के बाद कुकुर नदी में आई भीषण बाढ़ ने पूरे गांव में ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते कई घर, निर्माणाधीन मकान और प्राथमिक शाला भवन बर्बाद हो गए। आज भी गांव में चारों ओर मलबा, टूटी दीवारें और उजड़े आशियाने इस त्रासदी की गवाही दे रहे हैं।
नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर जनपद पंचायत ओरछा अंतर्गत ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित ग्राम कदेर में कुल 32 परिवार निवास करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ की चपेट में आकर करीब 15 से 16 परिवारों के घर पूरी तरह बह गए, जबकि कई अन्य मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। जिन परिवारों को केंद्र सरकार की जनमन आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुए थे, उनके निर्माणाधीन मकान भी बाढ़ के तेज बहाव में ढह गए। किसी की नींव बची, किसी की सिर्फ ईंटें और मलबा। सबसे अधिक चिंता की बात गांव के प्राथमिक शाला भवन की है। बाढ़ के तेज बहाव से स्कूल भवन की दीवारें और फर्श क्षतिग्रस्त हो गए। स्कूल में रखा मध्याह्न भोजन का राशन, बर्तन, बच्चों की टाट-पट्टी, शैक्षणिक सामग्री और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी पानी में बह गए। अब बच्चों की पढ़ाई पर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। और यहां कुल 16 बच्चे अध्यनरत कर रहे हैं
प्राथमिक शाला कदेर के प्रधान अध्यापक डूंगरम गोटा एवं वर्तमान में प्राथमिक शाला ब्रेहबेड़ा में पदस्थ प्रधान अध्यापक ने बताया कि 22 जुलाई की बाढ़ ने गांव में भारी तबाही मचाई। 15 से 16 परिवारों के घर, निर्माणाधीन जनमन आवास, पशुधन, घरेलू सामान और वर्षों की मेहनत देखते ही देखते पानी में समा गई। राहत की बात यह रही कि समय रहते ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए, इसलिए जनहानि नहीं हुई, लेकिन आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा हुआ है। तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि जहां कभी मकान और आंगन थे, वहां अब सिर्फ ईंटों का ढेर, टूटी दीवारें और बाढ़ के निशान बचे हैं। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बच्चों के सामने न घर बचा है और न ही सुरक्षित स्कूल।
वही ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवजा, जनमन आवास का पुनर्निर्माण, राहत सामग्री तथा प्राथमिक शाला भवन का शीघ्र पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि बाढ़ पीड़ित परिवार फिर से अपने जीवन की शुरुआत कर सकें।