नारायणपुर के बालेबेड़ा स्थित सुरक्षा एवं जनसुविधा कैंप में बाढ़ जैसे हालात, कई घंटे तक जीवन बचाने के लिए ऊंचे स्थानों पर डटे रहे 86वीं बटालियन के जवान।
[संवाददाता दीनू बघेल] नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। जहां एक ओर राज्य में नक्सलवाद पर लगातार प्रभावी कार्रवाई के बाद हालात सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में तैनात सुरक्षा बलों के जवान अब प्रकृति के रौद्र रूप से भी जूझने को मजबूर हैं। मामला नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ की हैं जहां चारों तरफ से घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित बालेबेड़ा गांव में स्थापित सुरक्षा एवं जनसुविधा कैंप का है, जहां BSF की 86वीं बटालियन के जवान तैनात हैं। लगातार दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण क्षेत्र की नदी-नाले उफान पर हैं। कैंप के समीप बहने वाली कुकुर नदी का जलस्तर अचानक इतना बढ़ गया कि तेज बहाव का पानी सीधे कैंप परिसर में घुस गया। देखते ही देखते पूरा परिसर जलमग्न होने लगा और जवानों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का अवसर तक नहीं मिल पाया।
ऐसे भयावह हालात में जवानों ने धैर्य और अदम्य साहस का परिचय दिया। अपनी जान बचाने के लिए कई जवान आवासीय टीन शेड की छत पर चढ़ गए, जबकि कुछ ने आसपास के पेड़ों का सहारा लिया। यही टीन की छत और पेड़ उस कठिन घड़ी में उनके लिए जीवनरक्षक साबित हुए। जानकारी के अनुसार, जवानों को कई घंटे तक इन्हीं ऊंचे स्थानों पर रहकर पानी कम होने का इंतजार करना पड़ा। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें चारों ओर बाढ़ का पानी और उसके बीच पेड़ व टीन की छत पर सुरक्षित बैठे जवान दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य साफ बताता है कि अबूझमाड़ में तैनात सुरक्षा बल केवल सुरक्षा चुनौतियों का ही नहीं, बल्कि यह प्राकृतिक आपदाओं का भी डटकर सामना करते हैं।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों ने पिछले वर्षों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है और अबूझमाड़ जैसे इलाकों में शांति स्थापित करने की दिशा में लगातार काम जारी है। लेकिन यह घटना बताती है कि नक्सल चुनौती कम होने के बावजूद यहां की भौगोलिक परिस्थितियां, दुर्गम जंगल, उफनती नदियां और अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाएं आज भी जवानों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। अबूझमाड़ के इन दुर्गम इलाकों में देश की सुरक्षा में दिन-रात डटे जवानों का यह संघर्ष केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का जीवंत उदाहरण है। विपरीत परिस्थितियों में भी उनका संयम और जज्बा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया।