संस्कृति से संविधान तक, 5 दिवसीय महाप्रशिक्षण शिविर में जागरूक हुई नई पीढ़ी
[संवाददाता दीनू बघेल] नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के ग्राम बड़े जम्हारी में एक आदिवासी संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण की दिशा में अनूठी और सराहनीय पहल देखने को मिली। कोया भूमकाल क्रांति सेना (KBKS) द्वारा आयोजित 5 दिवसीय महाप्रशिक्षण शिविर का आज भव्य समापन हुआ। इस शिविर में करंगाल परगना सहित आसपास के जिलों से आए सैकड़ों आदिवासी युवक-युवतियों ने भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों और संवैधानिक अधिकारों को गहराई से समझा।
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को आदिवासी समाज की पारंपरिक रूढ़ि प्रथा, घोटूल व्यवस्था, कोया पूनेम, ग्राम व्यवस्था और सामाजिक समीकरणों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम (FRA) जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। छिंद के पत्तों से सजे आयोजन स्थल और पारंपरिक परिधानों में सजे आदिवासी युवा इस प्रशिक्षण शिविर को अपनी पहचान और आत्मगौरव से जोड़ते नजर आए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ते हुए उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक बनाना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान बालिका शिक्षा, नशा मुक्ति, ग्राम स्वशासन और सामाजिक सुधार जैसे गंभीर विषयों पर भी संवाद किया गया। कार्यक्रम की विशेष आकर्षण यह रही कि देव परंपरा को जीवंत रूप में समझाने के लिए ग्रामीण अंचलों से आंगा, डोली और डांग को आयोजन स्थल पर लाया गया, जिससे युवाओं को अपने देवी-देवताओं और परंपराओं के महत्व को प्रत्यक्ष रूप से जानने का अवसर मिला। शिविर में शामिल युवाओं ने इस आयोजन को सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से आदिवासी समाज की नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, अधिकार और जिम्मेदारियों को समझने की नई दिशा मिलती है।