अबूझमाड़ में बदलती तस्वीर: जटवर में खुला 2026 का पहला कैंप, नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र में विकास की स्थायी दस्तक

[संवाददाता, दीनू बघेल] नारायणपुर। अबूझमाड़ का नाम आते ही वर्षों तक नक्सल हिंसा, दुर्गम जंगल और प्रशासनिक अनुपस्थिति की तस्वीर सामने आती रही है। लेकिन अब वही अबूझमाड़ धीरे-धीरे नक्सल प्रभाव से निकलकर विकास के रास्ते पर बढ़ता दिख रहा है। इसी बदलाव की कड़ी में नारायणपुर पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने वर्ष 2026 का पहला सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप घोर नक्सल प्रभावित ग्राम जटवर में स्थापित कर दिया है। यह कैंप न केवल नक्सल मुक्त भारत और नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को मजबूती देता है, बल्कि यह संकेत भी है कि अब राज्य की स्थायी मौजूदगी अंदरूनी माड़ क्षेत्र तक पहुंच चुकी है। बता दे की जिले के थाना कोहकामेटा क्षेत्रांतर्गत स्थित ग्राम जटवर को लंबे समय तक माओवादियों का आश्रय स्थल और रणनीतिक ठिकाना माना जाता रहा है। यहां प्रशासनिक पहुंच बेहद सीमित थी। दिनांक 09 जनवरी 2026 को इस गांव में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप की स्थापना, नक्सल विरोधी अभियानों की दृष्टि से एक रणनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। यह कैंप माड़ बचाओ अभियान के तहत खोला गया है, जिसका उद्देश्य केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि जनता और शासन के बीच की दूरी को खत्म करना है।

2025 में 27 कैंप, 2026 की शुरुआत निर्णायक मोड़ पर

नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2025 में कुल 27 नए सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित किए थे। इनमें नक्सलियों की अघोषित राजधानी माने जाने वाले कुतुल सहित कोडलियार, बेड़माकोटी, पदमकोट, कंडुलपार, नेलांगुर, पांगूड़, रायनार, एडजूम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका, परियादी, काकुर, बालेबेड़ा, कोडेनार, कोडनार, आदिनपार और मन्दोड़ा जैसे दुर्गम क्षेत्र शामिल हैं। इन कैंपों ने नक्सलियों की मूवमेंट, प्रभाव और सप्लाई लाइन को काफी हद तक सीमित किया। अब 2026 का पहला कैंप जटवर में खुलना यह दर्शाता है कि अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। जटवर में नवीन कैंप स्थापित होने के बाद आसपास के कोगाली, वारापिद्दा, वडापेंदा, करकाबेड़ा, गुरगापदर, घमंडी और जटवर गांवों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि वर्षों से अधूरी पड़ी मूलभूत सुविधाएं जैसे सड़क, इलाज, शिक्षा और संचार अब वास्तविक रूप ले सकेंगी। यह कैंप ग्रामीणों के लिए डर से मुक्ति और भरोसे की शुरुआत बनता नजर आ रहा है।

इस अभियान में नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर और BSF की 86वीं, 178वीं, 83वीं और 133वीं वाहिनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व और समन्वय में इस कैंप को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।आईजी बस्तर रेंज पी. सुन्दराज, डीआईजी कांकेर रेंज अमित कांबले, एसपी नारायणपुर रोबिनसन गुरिया, CAF और BSF के वरिष्ठ सेनानियों सहित जिले के पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में यह अभियान आगे बढ़ाया गया।

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