मारे गए बड़े नक्सली गणेश ऊईके का शिष्य मोहन कड़ती पत्नी समेत शामिल।
डेस्क दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान को आज एक बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। दंतेवाड़ा जिले में 63 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। यह आत्मसमर्पण पुलिस अधीक्षक गौरव राय के समक्ष किया गया।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कुल 36 इनामी नक्सली शामिल हैं, जिन पर 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इस सरेंडर को नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इनमें कुछ दिन पहले मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात नक्सली लीडर गणेश ऊईके का शिष्य मोहन कड़ती भी शामिल है, जिसने अपनी पत्नी समेत आत्मसमर्पण किया है।
आत्मसमर्पण के बाद मीडिया से बातचीत में मोहन कड़ती ने दक्षिण बस्तर में सक्रिय नक्सल नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि अभी भी पापा राव, राहुल और दिलीप जैसे बड़े नक्सली लीडर अपनी टीमों के साथ हथियारों से लैस होकर दक्षिण बस्तर के घने जंगलों में छिपे हुए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार सुरक्षा बलों की कार्रवाई, मुठभेड़ों में बड़े नक्सलियों का सफाया, और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहा है। लोन वर्राटू अभियान के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा 30 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने की तय डेडलाइन से पहले जंगलों में छिपे शेष नक्सली आत्मसमर्पण का रास्ता चुनते हैं या फिर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में ढेर होते हैं। यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर में नक्सलवाद के अंत की ओर एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।